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अररिया के 59 नाबालिग बच्चों को कटक में बचाया गया, मानव तस्करी का बड़ा शक
- Reporter 21
- 16 Apr, 2026
ओडिशा के कटक रेलवे स्टेशन पर RPF ने बिहार के अररिया से लाए गए 59 नाबालिग बच्चों को मानव तस्करी के शक में बचाया। बच्चों को मुफ्त पढ़ाई और रहने का लालच दिया गया था।
कटक/आलम की खबर:ओडिशा के कटक रेलवे स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की सतर्कता से एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां बिहार के अररिया जिले से लाए गए 59 नाबालिग बच्चों को मानव तस्करी की आशंका में समय रहते बचा लिया गया। यह घटना उस समय सामने आई जब ये बच्चे धौली एक्सप्रेस से उतरकर प्लेटफॉर्म पर पहुंचे और उनकी गतिविधियों ने सुरक्षाकर्मियों का ध्यान खींच लिया। प्रारंभिक जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जिसने इस पूरे मामले को गंभीर बना दिया है।
संदिग्ध गतिविधियों ने बढ़ाया शक
सूत्रों के अनुसार, जब ट्रेन कटक स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर पहुंची, तो बड़ी संख्या में छोटे-छोटे बच्चों का समूह बिना किसी अभिभावक के उतरता देखा गया। इस पर ड्यूटी पर मौजूद RPF जवानों को संदेह हुआ। उन्होंने तुरंत बच्चों को रोककर पूछताछ शुरू की। जांच में पाया गया कि सभी बच्चे नाबालिग हैं और उनके साथ कोई जिम्मेदार अभिभावक मौजूद नहीं है, जिससे मामला और संदिग्ध हो गया।
बच्चों की स्थिति और उनके व्यवहार ने यह संकेत दिया कि वे किसी संगठित तरीके से यहां लाए गए हैं। इसी आधार पर RPF ने तुरंत मामले को गंभीरता से लेते हुए आगे की कार्रवाई शुरू की।
“मुफ्त पढ़ाई और रहने का लालच”
पूछताछ के दौरान बच्चों ने जो जानकारी दी, उसने सभी को हैरान कर दिया। उन्होंने बताया कि उन्हें बिहार के अररिया जिले के गरीब और ग्रामीण इलाकों से लाया गया था। उन्हें यह कहकर तैयार किया गया कि ओडिशा में एक मदरसे में उनका दाखिला कराया जाएगा, जहां उन्हें मुफ्त शिक्षा, रहने और खाने की सुविधा मिलेगी।
इस लालच में आकर कई परिवारों ने अपने बच्चों को भेज दिया। बच्चों को यह भी पूरी जानकारी नहीं थी कि उन्हें कहां ले जाया जा रहा है और वहां उनका क्या इंतजाम होगा।
लंबा सफर, कई पड़ाव
बच्चों ने बताया कि उनकी यात्रा अररिया से शुरू हुई थी। वहां से उन्हें पहले कटिहार लाया गया, फिर हावड़ा होते हुए कटक पहुंचाया गया। यह पूरा सफर कई चरणों में तय कराया गया, जिससे यह शक और गहरा हो गया कि इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा हो सकता है।
यात्रा के दौरान बच्चों के साथ कोई अभिभावक नहीं था, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि उन्हें योजनाबद्ध तरीके से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा रहा था।
चाइल्डलाइन और CWC की त्वरित कार्रवाई
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए RPF ने तुरंत चाइल्डलाइन को सूचना दी और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू की। इसके बाद सभी बच्चों को कटक की चाइल्ड वेलफेयर कमिटी (CWC) के हवाले कर दिया गया।
CWC ने बच्चों की सुरक्षा, देखभाल और पुनर्वास की जिम्मेदारी संभाल ली है। बच्चों के लिए रहने, खाने और स्वास्थ्य जांच की पूरी व्यवस्था की गई है, ताकि वे सुरक्षित वातावरण में रह सकें।
प्रशासनिक समन्वय से आगे बढ़ी प्रक्रिया
अररिया जिले की चाइल्ड वेलफेयर कमिटी के अध्यक्ष दीपक कुमार वर्मा (उर्फ रिंकू वर्मा) ने बताया कि ओडिशा प्रशासन पूरी संवेदनशीलता के साथ इस मामले को देख रहा है। सभी बच्चों का मेडिकल चेकअप कराया गया है और उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
रेस्क्यू किए गए बच्चों की सूची अररिया प्रशासन को भेज दी गई है। वहां जिला बाल संरक्षण इकाई और CWC की टीमें बच्चों के पते का सत्यापन कर रही हैं। अभिभावकों को सूचित करने के लिए विशेष टीम गठित की गई है, जो जल्द से जल्द बच्चों को उनके परिवारों से मिलाने की प्रक्रिया को पूरा करेगी।
मानव तस्करी के एंगल से जांच जारी
इस पूरे मामले को मानव तस्करी के शक के रूप में देखा जा रहा है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि बच्चों को किसने और किन परिस्थितियों में वहां तक पहुंचाया। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या इसके पीछे कोई बड़ा गिरोह सक्रिय है।
अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी प्रकार की अवैध गतिविधि की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बार-बार सामने आ रहे ऐसे मामले
यह पहला मामला नहीं है जब इस तरह की घटना सामने आई हो। समय-समय पर देश के विभिन्न हिस्सों से ऐसे मामले सामने आते रहते हैं, जहां गरीब परिवारों के बच्चों को बेहतर भविष्य और शिक्षा के नाम पर दूसरे राज्यों में ले जाया जाता है।
कई बार ये मामले मानव तस्करी से जुड़े होते हैं, जहां बच्चों का शोषण किया जाता है। ऐसे में RPF और बाल कल्याण संस्थाओं की सतर्कता बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
निष्कर्ष: सतर्कता से टली बड़ी घटना
कटक रेलवे स्टेशन पर RPF की मुस्तैदी और समय पर कार्रवाई के चलते 59 नाबालिग बच्चों को संभावित खतरे से बचा लिया गया। यह घटना एक बार फिर यह याद दिलाती है कि समाज के कमजोर वर्गों के बच्चे किस तरह आसानी से ऐसे जाल में फंस सकते हैं।
अब प्रशासन की प्राथमिकता इन बच्चों को सुरक्षित उनके परिवारों तक पहुंचाना और इस पूरे मामले की गहराई से जांच करना है। आने वाले दिनों में जांच के नतीजे इस मामले की असली तस्वीर सामने ला सकते हैं।
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